मई - 2007
देखो, शब्द कहीं से लो, अरबी, फारसी, पंजाबी, गुजराती, अंग्रेजी कहीं का हो, ख्याल रहे कि ख्यालात का तसब्बुर और ज़वान की रवानगी ........ भाषा की प्रवहमानता और विचारों का क्रम बना रहे।
[उपेन्द्रनाथ अश्क को लिखे पत्र से साभार]
विचार कुंज
देखो, शब्द कहीं से लो, अरबी, फारसी, पंजाबी, गुजराती, अंग्रेजी कहीं का हो, ख्याल रहे कि ख्यालात का तसब्बुर और ज़वान की रवानगी ........ भाषा की प्रवहमानता और विचारों का क्रम बना रहे।
* "स्वाधीनता जब अपने सर्वोत्तम रूप में प्रकट होती है तब उसके साथ-साथ सर्वोच्च रूप में अनुशासन और विनम्रता भी रहती है।"
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